सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

middle body

साहसी कुत्ता ( Fearless Dog ) one of the best story for readers

Fearless Dog (साहसी कुत्ता)


साहसी कुत्ता ( Fearless Dog  ) one of the best story for readers


अमरीका के जंगल में एक साल का एक साहसी कुत्ता अपनी माँ के पास बैठा था।

उन दोनों  के बाल काफी बड़े  बड़े थे।

इससे दूर से देखने वाले उन्हें  भेड़िया समझ लेते थे।

थोड़ी ही देर में कुत्ते ने आदमियों की आवाज

सुनी और वह भोंकना ही चाहता था कि इतने में उसकी बूढी माँ की

गरदन में एक तीर लगा और वह वहीं जमीन पर गिर गई। कुत्ते को यह

बात बहुत बुरी लगी और वह तीर चलाने वाले लोगों की और भाँ-भूँ

करता हुआ झपटा। रेड इडियन की टोली में से एक आदमी उस पर भी

तीर चलाना चाहता था, कि इतने में एक रेड इंडियन लड़का आगे बढा

और बोला, 'तुम्हें इस छोटे से कुत्ते पर तीर चलाते हुए शर्म नहीं आती।

रहने दो, मैं इसे पालूँगा।' ऐमा कहकर रेड इंडियन लड़का आगे बढ़ा

और उमने उस कुत्ते को पकड़ लिया। कुत्ता उस उसे काटना चाहता था

परतु लड़के ने इस होशियारी से उसका गला पकड़ रखा था कि वह

लड़के को काट नहीं सका।


https://pyarastick.blogspot.com/2020/07/motivational-story-in-hindi.html?m=1

Daring dog (साहसी कुत्ता):-

वह लडका रेड इंडियनों के एक सरदार का बेटा था। उसने इस कुत्ते को

पालना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में कुत्ता भी इसस लडके से प्रेम

करने लगा। एक दिन लड़के उस कुत्ते का घपथपाते हुए कहा, "तुम एक

बहादुर कुत्ता हो। तुम्हारी बहादुरी हम सब लोग जंगल में देख चुके हैं।

तुम जबरदस्त लड़ाकू हो। तुम्हारी बहादुरी की वजह से हम लोग अब

आज से तुम्हे 'बहादुर' कहेंगे।" कुत्ता उस लड़के की बात सुनता गया।

उसकी समझ में एक भी बात नहीं आई लेकिन प्रेम दिखलाने के लिए

वह पूँछ हिलाता रहा।

रेड इडियन लडका और उसके साथी उस कुत्ते को 'बहादुर' कहकर

पुकारने लगे। धीरे-धीरे कुत्ता भी समझ गया कि उसका नाम 'बहादुर'

रखा गया है। रेड इडियन लड़का जब उसे 'बहादुर' कह कर दूर मे

पुकारता तो वह कुत्ता बेतहाशा दौड़कर उसके पास जाता और उसके

इर्द-गिर्द कूदने लगता। वह लड़का रोजाना मछली और मांस के टुकड़े

उसे खाने को देता। जहाँ कहीं वह लडका जाता, बहादुर कुत्ता उसके

साथ जहर जाता।

Daring dog (साहसी कुत्ता):-

एक दिन दोपहर को रेड इडियन लड़का धनुष-बाग लेकर उसी जंगल

की ओर गया जहाँ उसे बहादुर कुत्ता मिला था। उसके साथ बहादुर

कुत्ता भी था। अपने लड़कपन के जंगल को देखकर बहादुर खूब खुश

हुआ। वह इधर-उधर उछलने कूदने लगा। थोड़ी ही देर में वह उस जगह

भी पहुँचा जहाँ यह अपनी माँ के साथ रहा करता था और जहाँ उसकी

माँ को तीर चलानेवाले रेड इंडियनों ने मार डाला था। वह बड़ी देर तक

वहाँ उस पेड़ के नीचे खड़ा रहा जिसके नीचे वह बचपन में अपनी माँ

का दूध पीता और उसके बदन पर लोटता था। रेड इंडियन लड़का यह

समझता था कि बहादुर कुत्ता उसके पीछे आ रहा है। इसी से वह बहुत

दूर चला गया।

थोड़ी ही देर मे बहादुर के कानो में यह आवाज पडी, "बहादुर! बहादुर!!

दौड़ो, बचाओ। तुम कहाँ हो ? बहादुर, दौडो।"

बहादुर अपने मालिक की आवाज अच्छी तरह पहचानता था। वह तेजी

से उसी ओर झपटा जिधर से डरी हुई आवाज आ रही थी। थोड़ी ही देर

में वह उस जगह पहुँच गया जहाँ उसका मालिक खड़ा था। उसके पास

ही जमीन पर कई मरे हुए भेड़िये पड़े थे जिन्हें उस रेड इंडियन लड़के ने

धनुष और बाण की सहायता मे मार डाला था। अब उसके पास एक भी

बान नहीं था और सामने की झाड़ी में एक खूंखार भेड़िये की आँखें

चमक रही थीं। यह भेड़िया मरे हुए भेड़ियों का सरदार था। बहादुर कुत्ते

ने आते ही सभी बात समझ लीं। यह बात भी उसकी समझ में आ गई

कि सामने की झड़ियों में भेड़ियों का सरदार बैठा है और वह तुरंत ही

उसके मालिक रेड इंडियन पर धावा करनेवाला है। बहादुर झाड़ी में छिपे

हुए भेड़िये की ओर झपटा। दोनों में बहुत देर तक लड़ाई होती रही।

Courageous dog(साहसी कुत्ता):-

कभी भेड़िया ऊपर जाता और कभी नीचे । रेड इंडियायन लड़का बार-

बार कुत्ते को शाबाशी देता हुआ कहता, "शाबाश, बहादुर।" थोड़ी ही देर

में भेड़िया जमीन पर गिर गया और मर गया। रेड इंडियन लड़के ने

दौड़कर बहादुर को उठा लिया और उसे थपथपाना शुरू कर दिया।

बहादुर का शरीर भी कई जगह कट गया था और वह बड़े ज़ोरों से हाँफ

रहा था। लड़का थोड़ी देर तक वहां रुका रहा। बाद में उसने बहादुर का

मुँह अपने हाथ में लेकर कहा, "बहादुर, मैंने तुम्हारी जिंदगी बचाई थी।

आज तूने मेरी जिंदगी बचा दी। तुम हमारे सब मे बड़े दोस्त हो।" इसके

बाद दोनों चल पडे।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिखावे का फल मिल - dikhabe ka fal mila hindi story on self-assessment

दिखावे का फल मिला दिखावे का फल मिला   - मैनेजमेंट की शिक्षा प्राप्त एक युवा नौजवान को बहुत अच्छी नौकरी मिलती है। उन्हें कंपनी की ओर से काम करने के लिए एक अलग केबिन दिया जाता है। जब युवक पहले दिन ऑफिस जाता है और बैठकर अपने शानदार केबिन को निहारता है। तभी दरवाजे पर दस्तक देने की आवाज आती है । दरवाजे पर एक साधारण व्यक्ति रहता है। लेकिन युवक ने उसे अंदर आने के लिए कहने के बजाय उसे आधे घंटे तक बाहर इंतजार करने के लिए कहता है। आधे घंटे के बाद, आदमी फिर से केबिन के अंदर जाने की अनुमति मांगता है। उसे अंदर आते देख युवक टेलीफोन से बात करने लगता है। वह फोन पर बहुत सारे पैसोँ की बातेँ बोलता है। अपनेँ ऐशो – आराम के बारे मेँ कई प्रकार की हाँकनेँ लगता है,  सामने वाला व्यक्ति उसकी सारी बातें सुन रहा है। लेकिन वह युवक फोन पर जोर-जोर से डींग मारता जारी रखता है। जब उसकी बात खत्म हो जाती है, तो वह सामान्य व्यक्ति से पूछता है कि आप यहाँ क्या करने आए हैं? युवक को विनम्रता से देखता हुआ व्यक्ति बोला, “सर, मैं यहाँ टेलीफोन की मरम्मत करने आया हूँ। मुझे खबर मिली है कि जिस टेलीफोन से आप बात कर...

भगवान बचाएगा-bhagban bachayega mujhe hindi story for reader

भगवान बचाएगा https://pyarastick.blogspot.com/2020/07/Bhagban-kanha-he.html भगवान बचाएगा :- एक बार एक गाँव में एक साधु रहता था, वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और वह लगातार एक पेड़ के आधार पर आर्थिक रूप से काम कर रहा था। उनका ईश्वर में अटूट विश्वास था और ग्रामीण भी उनका सम्मान करते थे एक बार गाँव में भयंकर बाढ़ की स्थिति थी। हर जगह पानी दिखाई देने लगा और सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाने लगे जब लोगों ने देखा कि संत पेड़ के आधार पर बैठे भगवान का नाम जप रहे हैं, तो उन्होंने उन्हें जगह छोड़ने की सलाह दी। लेकिन बंदर ने कहा- "अपनी जान बचाओ, मेरा भगवान मुझे बचाएगा!" धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ गया, और पानी की उम्र कमर तक पहुंच गई, इसलिए वहां से एक नाव पार हो गई। नाविक ने कहा, "इस नाव पर आइए , हे संत राजा, मैं आपको एक सुरक्षित स्थान पर लेके जाऊंगा।" "नहीं, मुझे आपकी मदद की ज़रूरत नहीं है, मेरा भगवान मुझे बचाएगा!" "यह बस तब हमारे ध्यान में आया। नाव वाला चला गया। भगवान बचाएगा :- थोड़ी देर बाद बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई, पेड़ पर बैठे बंदर और यह ...

संन्यासी और नर्तकी को स्वर्ग मिले या नर्क - sanyasi aur nartaki ko swarg mila ya nark

    संन्यासी और नर्तकी को स्वर्ग मिले या नर्क  संन्यासी और नर्तकी  - एक गाँव में एक संन्यासी हुआ करते थे जो दिन भर लोगों को उपदेश देते थे। उसी गाँव में एक नर्तकी थी जो लोगों के सामने नृत्य करती थी और उनका मनोरंजन करती थी। एक दिन गाँव में बाढ़ आ गई और दोनों की एक साथ मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद, जब वे दोनों यमलोक पहुँचे, तो कहा गया कि उन्हें उनके कर्मों और उनके पीछे छिपी भावनाओं के आधार पर स्वर्ग या नर्क दिया जानेँ की बात कही गई। संन्यासी स्वयं आश्वस्त था कि वह स्वर्ग को पा लेगा। नर्तकी उसके मन में ऐसा कुछ नहीं सोच रही थी। नर्तकी फैसले का इंतजार कर रही थी। तभी घोषणा हुई कि नरक संन्यासी को दिया जाता है और नर्तकी को स्वर्ग। संन्यासी और नर्तकी  - इस निर्णय को सुनकर, संन्यासी क्रोधित होकर यमराज पर चिल्लाया और गुस्से से पूछा,  "यह किस तरह का न्याय है, महाराजा? मैंने लोगों को जीवन भर उपदेश देता रहाऔर मुझे नर्क में जाना तय हुआ!" जबकि इस नर्तकी ने अपना सारा जीवन लोगों को रिझानेँ में लगा दिया और इसे स्वर्ग दिया जा रहा है। क्यों? " यमराज ने शांति से उत्तर दिया, "इस ...