सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

middle body

युधिष्ठर को आभास था kalyug me kya hone wala he -part of Mahabharata

युधिष्ठर को आभास था कलुयुग में क्या होगा

युधिष्ठर-को-आभास-था-kalyug-me-kya-hone-wala-he-part-of-Mahabharata

https://pyarastick.blogspot.com/2020/07/prem-ke-liye-dodna-hi-parta-he-hindi.html 

युधिष्ठर को आभास था:- पाण्डवो का अज्ञातवाश समाप्त होने मे कुछ समय शेष रह गया था।

पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान ढूढं रहे थे,

उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पडी शनिदेव के मन मे विचार आया कि इन सब मे बुधिमान कौन है परिक्षा ली जाय।

देव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी मे उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिन।

अचानक भीम की नजर महल पर पडी
और वो आकर्सित हो गया ,

भीम, यधिष्ठिर से बोला-भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ ।

पाण्डवो भीम महल के द्वार पर पहुँचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप मे खड़े थे,

भीम बोला- मुझे महल देखना है!

शनिदेव ने कहा-महल की कुछ शर्त है

1-शर्त महल मे चार कोने आप एक ही कोना देख सकते है।
2-शर्त महल मे जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे।
3-अगर व्याख्या नही कर सके तो कैद कर लिए जावोगे।

भीम ने कहा- मै स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा

और वह महल के पूर्व क्षोर की और गया

वहां जाकर उसने अधभूत पशु पक्षी और फुलों एवं फलों से लदै वृक्षो का नजारा किया,

आगे जाकर देखता है कि तीन कूऐ है अगल-बगल मे छोटे कूऐ और बीच मे एक बडा कुआ।

युधिष्ठर को आभास था कलुयुग में क्या होगा :-

बीच वाला बडे कुए मे पानी का उफान आता है और दोनो छोटे खाली कुओ को पानी से भर दता है। फिर कुछ देर बाद दोनो छोटे कुओ मे उफान आता है तो खाली पडे बडे कुऐ का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नही पाता और लौट कर दरबान के पास आता है।

दरबान -क्या देखा आपने?

भीम- महाशय मैने पेड पौधे पशु पक्षी देखा वो मैने पहले कभी नही देखा था जो अजीब थे। एकबात समझ मे नही आई छोटे कुऐ पानी से भर जाते है बडा क्यो नही भर पाता ये समझ मे नही आया।

दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये है और बंदी घर मे बैठा दिया।

अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बतादी और अर्जुन पश्चिम वाले क्षोर की तरफ चला गया।

आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत मे दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दुसरी तरफ मक्का की फसल ।

बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा
मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही अजीब लगा कुछ समझ नही आया वापिस द्वार पर आ गया।

दरबान ने पुछा क्या देखा,

अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ मे नही आई।

देव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी है ।

नकुल आया बोला मुझे महल देखना है

फिर वह उतर दिशा की और गया वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बाछियों का दुध पीती है उसके कुछ समझ नही आया द्वार पर आया

युधिष्ठर को आभास था कलुयुग में क्या होगा :-

देव ने पुछा क्या देखा?

नकुल बोला महाशय गाय बाछियों का दुध पिती है यह समझ नही आया तब उसे भी बंदी बना लिया।

सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की और गया अंतिम कोना देखने के लिए क्या दे खता है वहां पर एक सोने की बडी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डौले पर गिरे नही छूने पर भी वैसे ही रहती है समझ नही आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ मे नही आई तब वह भी बंदी हो गया।

चारों भाई बहुत देर से नही आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल मे गये।

भाईयो के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वो शर्त अनुसार बंदी है।

युधिष्ठर को आभास था कलुयुग में क्या होगा :-

युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा ?

भीम ने कुऐ के बारे मे बताया

तब युधिष्ठिर ने कहा-यह कलियुग मे होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नही भर पायागें।

भीम को छोड दिया।

अर्जुन से पुछा तुमने क्या देखा ??

उसने फसल के बारे मे बताया

युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग मे होने वाला है वंश परिवर्तन अर्थात ब्राहमन के घर बनिये की लडकी और बनिये के घर शुद्र की लडकी ब्याही जायेगी।

अर्जुन भी छूट गया।

नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का व्र्तान्त बताया

तब युधिष्ठिर ने कहा-कलियुग मे माताऐं अपनी बेटियों के घर मे पलेगी बेटी का दाना खायेगी और बेटे सेवा नही करेंगे ।

तब नकुल भी छूट गया।

सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वर्तान्त बताया,

तब युधिष्ठिर बोले-कलियुग मे पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म फिर भी जिदां रहेगा खत्म नही होगा।।  आज के कलयुग मे यह सारी बाते सच साबित हो रही है ।।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिखावे का फल मिल - dikhabe ka fal mila hindi story on self-assessment

दिखावे का फल मिला दिखावे का फल मिला   - मैनेजमेंट की शिक्षा प्राप्त एक युवा नौजवान को बहुत अच्छी नौकरी मिलती है। उन्हें कंपनी की ओर से काम करने के लिए एक अलग केबिन दिया जाता है। जब युवक पहले दिन ऑफिस जाता है और बैठकर अपने शानदार केबिन को निहारता है। तभी दरवाजे पर दस्तक देने की आवाज आती है । दरवाजे पर एक साधारण व्यक्ति रहता है। लेकिन युवक ने उसे अंदर आने के लिए कहने के बजाय उसे आधे घंटे तक बाहर इंतजार करने के लिए कहता है। आधे घंटे के बाद, आदमी फिर से केबिन के अंदर जाने की अनुमति मांगता है। उसे अंदर आते देख युवक टेलीफोन से बात करने लगता है। वह फोन पर बहुत सारे पैसोँ की बातेँ बोलता है। अपनेँ ऐशो – आराम के बारे मेँ कई प्रकार की हाँकनेँ लगता है,  सामने वाला व्यक्ति उसकी सारी बातें सुन रहा है। लेकिन वह युवक फोन पर जोर-जोर से डींग मारता जारी रखता है। जब उसकी बात खत्म हो जाती है, तो वह सामान्य व्यक्ति से पूछता है कि आप यहाँ क्या करने आए हैं? युवक को विनम्रता से देखता हुआ व्यक्ति बोला, “सर, मैं यहाँ टेलीफोन की मरम्मत करने आया हूँ। मुझे खबर मिली है कि जिस टेलीफोन से आप बात कर...

ना माया मिली न राम-Na maya mili na Ram-Hindi Story on Greed

ना माया मिली न राम! ना माया मिली न राम:- एक गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम हीरा और दूसरे का नाम मोती था। दोनों में गहरी दोस्ती थी और बचपन से ही खेल, कूद, पढ़ना और लिखना करते थे। जब वह बड़ा हुआ, तो उस पर काम खोजने का दबाव था। लोग ताने देने लगे कि दोनों मस्त हैं और एक पैसा भी नहीं कमाते। एक दिन, दोनों ने विचार-विमर्श किया और शहर की ओर जाने का फैसला किया। अपने घर से सड़क से एक ड्रिंक लेते हुए, दोनों भोर में शहर की ओर चल पड़े। शहर का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता था। दोनों एक साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। रास्ता लंबा था, इसलिए उन्होंने एक पेड़ के नीचे आराम करने का फैसला किया। दोनों मित्र आराम कर रहे थे कि एक साधु वहाँ आया। भिक्षु तेजी से हांफ रहा था और बहुत डरा हुआ था। मोती साधु से अपने डर का कारण पूछता है। भिक्षु ने बताया कि- आगे के रास्ते में एक चुड़ैल है और उसे हराकर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है, जैसे कि आप दोनों यहां से लौटते हैं। यह कहने के बाद, भिक्षु अपने पथ पर लौट आया। साधु की बातें सुनकर हीरा और मोती भ्रमित हो गए। दोनों आगे जाने से डरते थे। भगवान बचाएगा ना माया मिली न राम:...

कहाँ छुपी हैं चमत्कारी शक्तियां - kanha chupi he chamatkari shaktiyan

कहाँ छुपी हैं चमत्कारी शक्तियां कहाँ छुपी हैं चमत्कारी शक्तियां - एक बार जब देवताओं में चर्चा हो रहो थी, तो चर्चा का विषय था कि मनुष्य की हर इच्छा को पूरा करने वाली गुप्त चमत्कारी शक्तियों को कैसे छिपाया जाए। सभी देवताओं में बहुत बहस हुई। एक देवता ने अपनी राय रखी और कहा कि हम इसे एक जंगल की गुफा में रखते हैं। दूसरे देवता ने उसे टोका और बोला कि नहीं - नहीं, हम इसे पहाड़ की चोटी पर छिपा देंगे। उस देवता का वचन पूरा भी नहीं हुआ था कि कोई कहने लगा, "न तो हम इसे एक गुफा में छिपाएंगे और न ही किसी पहाड़ की चोटी पर छिपाएंगे । हम इसे समुद्र की गहराई में छिपाते हैं, यह जगह इसके लिए सबसे उपयुक्त होगी। ” सभी लोगों की राय समाप्त होने के बाद, एक बुद्धिमान देवता ने कहा, हम मनुष्यों की चमत्कारी शक्तियों को मनुष्यों की गहराई में क्यों नहीं छिपा दें। चूंकि उनका मन बचपन से ही इधर-उधर दौड़ता रहता है। कहाँ छुपी हैं चमत्कारी शक्तियां - मनुष्य कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसके भीतर इतनी अद्भुत और अनोखी शक्तियाँ छिपी हो सकती हैं। और वह उन्हें बाहरी दुनिया में खोजता रहेगा, इसलिए हम इन मूल्यवान शक्तियों को ...