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दोस्ती की आग जलाओगे- dosti ki aag jalaoge Hindi story on True Friendship

दोस्ती की आग जलाओगे

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दोस्ती की आग - बिक्रम नाम के एक लड़के को पैसों की सख्त जरूरत थी। उसने अपने मालिक से मदद मांगी।

मालिक पैसे देने को तैयार हो गया लेकिन एक शर्त रखी।

शर्त यह थी कि अली को बिना आग जलाए पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर रात बितानी थी।

अगर वह ऐसा कर पाता तो उसे बड़ा इनाम मिलता और अगर वह नहीं कर पाता तो उसे मुफ्त में काम करना पड़ता।

जब बिक्रम ने दुकान छोड़ी, तो उसने महसूस किया कि वास्तव में ठंड थी और बर्फीली हवाएँ इसे और भी कठिन बना रही थीं।

उसे अपने मन में लगा कि शायद इस शर्त को स्वीकार कर उसने बहुत बड़ी मूर्खता की है।

दोस्ती की आग -

घबराहट में वह फौरन अपने दोस्त राजेश के पास पहुंचा और सारी बात बताई।

राजेश ने कुछ देर सोचा और कहा, "चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।

कल रात जब तुम पहाड़ी पर होगे, तो ठीक सामने देखना , मैं रात भर आग जलाकर तुम्हारे सामने वाली पहाड़ी पर बैठूंगा।

तुम आग को देखना और हमारी दोस्ती के बारे में सोचना ; वह तुमको गर्म रखेगी।

और बाद में मेरे पास आना, जब तुम रात बिता चुका होगा, तो मैं तुझ से बदले में कुछ लूंगा।

अगली रात बिक्रम पहाड़ी पर पहुंचा, राजेश भी सामने पहाड़ी पर आग जल कर बैठा था।

अपने दोस्त के साहस से बिक्रम ने किसी तरह उस बर्फीली रात को काट दिया।

मालिक ने उसे शर्त के मुताबिक इनाम के तौर पर ढेर सारे पैसे दिए।

इनाम पाकर वह राजेश के पास पहुँचा और बोला,

"तुमने कहा था कि मेरी मदद के बदले में तुम कुछ लोगे...तुम्हें कितने पैसे चाहिए।"

राजेश ने कहा, 'हां, मैंने कुछ लेने को कहा था, लेकिन वह पैसा नहीं है।

मैं तुमसे एक वादा लेना चाहता हूं। वादा करो कि अगर मेरे जीवन में कभी बर्फीली हवा बह रही हो तो तुम मेरे लिए दोस्ती की आग जलाओगे।

बिक्रम ने तुरंत उसे गले लगा लिया और हमेशा के लिए दोस्त बनने का वादा किया।

दोस्ती की आग -

दोस्तों कहा जाता है दोस्ती वो पहला रिश्ता होता है जो हम खुद बनाते हैं। हम अन्य रिश्तों के साथ पैदा होते हैं।

सचमुच, अगर हम अपने जीवन से "दोस्तों" को घटा दें, तो जीवन कितना खाली लगता है।

दोस्त बनने का मतलब सिर्फ खुशियां बांटना नहीं है।

दोस्ती का असली मतलब यह है कि मुसीबत में अपने दोस्त का साथ देना। जब उसे हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

क्या आपका कोई सच्चा दोस्त है? बेशक, वह वही है जिसके आप एक सच्चे दोस्त हैं।

और अगर नहीं तो सबसे पहले आपको एक सच्चा दोस्त बनना चाहिए... आप अपने आप एक सच्चे दोस्त बन जाएंगे।

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